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तेरी जूठी चाय की जिद!

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तेरी जूठी चाय की जिद!











तेरी जूठी चाय की जिद
मेरे लिए सिर्फ
दूध,चायपत्ती और चीनी को
उबालकर बनायी चाय नही होती...!

तेरे होठों को चूमकर आने वाली
इठलाती चाय की प्याली तो
एक अलहदा जरिया है
तेरे चीनी सी मीठी यादों को जीने का
तेरे चायपत्ती से कड़वे गम को पीने का !

तेरी जूठी एक प्याली चाय के साथ
मैं जानना चाहता हूं तेरी ज़िंदगी के हर वो पल
जो अनकही है अब तक
मैं जानना चाहता हूं वो तमाम किस्से
जो सुना ना सकी तू अब तक
मैं सुनना चाहता हूं तेरी दास्तां
जो अनसुनी है अब तक
मैं जानना चाहता हूं
तेरे उन टूटे हुए ख्वाबों को
जिन्हें जी लेना चाहती थी तू
मैं जानना चाहता हूं
उन अधूरे ख्वाबों को
जिन्हें पूरा करने की तमन्ना है आज भी तुझमें जिंदा !

तेरे गर्म चाय की प्याली से उठते हुए धुओं के साथ
तेरी सारी फिक्र को उड़ा देने की हसरत रखता हूं
तेरे हर अधूरे ख्वाब को पूरा करने की जिद है अब
महज दो प्याली चाय के साथ
दो अजनबी शायद इतनी बातें कर लेतें हैं
जितनी अक्सर अपनो के बीच भी नही हो पाती

तो बस जब भी मैं तेरी जूठी चाय के लिए  इशारा करूं
तो इंकार ना करना
हां कहकर बांट लेना मेरे साथ
अपनी चीनी सी मीठी यादों को
और चायपत्…

मैं तुझे साथ लेकर चलता...

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मैं तुझे साथ लेकर चलता...

कमबख़्त जमाने की दुश्वारियां ना होती
तो खु़दा कसम मैं तुझे साथ लेकर चलता.... फरेबी दुनिया की बंदीशे ना होती  तो खु़दा कसम मैं तुझे साथ लेकर चलता.... जमाने में रूसवाई का खौफ ना होता  तो खु़दा कसम मैं तुझे साथ लेकर चलता.... सरेआम ज़लील करने की रिवायत ना होती तो खु़दा कसम मैं तुझे साथ लेकर चलता.... अपनो के ख़फा हो जाने का खौफ ना होता  तो खुदा कसम मैं तुझे साथ लेकर चलता.... जाहिर कर सकता जमाने को की अक्स हूं तेरा  तो खुदा कसम मैं तुझे साथ लेकर चलता.... गर मिल जाता तेरा इक अलहदा सा इशारा  तो खुदा कसम मैं तुझे साथ लेकर ही चलता...!
- अजीत सिंह

तबाही के खतरनाक मुहाने पर खड़ा है भारत

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तबाही के खतरनाक मुहाने पर खड़ा है भारत !
क्या वीरा जैसा वतनपरस्त बेटा फिर पैदा होगा?

वह वीरा था। अपनी मां का वीरा, पंजाब का वीरा, इस देश का वीरा। उसकी रघो में वतनपरस्ती का लहु दौड़ता था। उसका रोम-रोम ब्रिटिश हुवूâमत के खिलाफ जंग को आतुर था। उसके बाजुओं में तानाशाही सरकार को उखाड़ पेंâकने की क्षमता थी। उसके पैरों में साम्राज्यवादी व्यवस्था को कुचलने की ताकत थी। उसके दिल में गरीबों, मजदूरों, किसानों व बेसहाराओं के प्रति बेइंतहा मुहब्बत थी। उसकी आत्मा जाति और धर्म के झगड़े से नफरत करती थी। उसकी आंखों में आजाद भारत का सपना था।  वह वीरा जिसे महज २३ वर्ष की उम्र में फांसी के तख्त पर लटका दिया गया। उसकी मां उसके सिर को अपने गोद में रखकर सहलाने के लिए तरसती रह गयी, उसकी बहन उसकी कलाई पर राखी बांधने के लिए उसका इंतजार करती रह गयी और पिता बुढ़ापे के सहारे के लिए अपने जवान बेटे का कांधा ढ़ूंढ़ता रह गया। मगर वह लौट कर नही आया, वह चला गया। इस दुनिया को छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए। उसकी बुलंद आवाज सदा के लिए खामोश हो गयी, ना जाने क्यों वो बहोत जल्दी ही रूठ गया हमसे।  उसके जाने के बाद कुछ बचा था तो लाहौर सेंट्…

बस साथ है तो एक हमसफर...

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बस साथ है तो एक हमसफर...

मुख़्तसर सी जिंदगी में अनजाना है यह सफर । मंजिलों से बेगाने हैं हम  कोई सफर में है यह सफर। खामोशी से कर रहे हैं हम जिंदगी गुजर बसर.... दर्द के समंदर में तनहा कर रहे हैं हम सफर...। ना रास्ता ना मंजिल ना घर बस साथ है तो एक हमसफर।

बे-आबरू होकर निकली इस मुल्क के सरहद से वो !

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बे-आबरू होकर निकली इस मुल्क के सरहद से वो !प्यार एक गहरा और खुशनुमा एहसास है। जो कहने को तो ढ़ाई अक्षर भर का होता है लेकिन इस ढ़ाई अक्षर के छोटे से शब्द की गहराई का अंदाजा आज तक कोई न लगा पाया। प्यार उस रंगीन दुनिया का नाम है जो इंसान के बदरंग जिंदगी को रंगीनियत से सराबोर कर देती है। यह तो एक अमूर्त एहसास है जिसका इ़जहार भी जुबान से नही बल्कि आंखों से होता है...।  और भले ही इसका इजहार आंखो से होता हो लेकिन होता तो वह हृदय का भाव है। प्यार में जरा सा उथल-पुथल से दिल की धड़कन बढ़ जाती है। प्यार हृदय से होता है पर हृदय पर किसी का वश नही होता। वह कब किस पर आ जाएगा कहना कठिन है। प्यार तो अनंत है, असीम है।
मानो या ना मानो मगर प्यार के मामले में स्त्री अधिक भावुक और संवेदनशील होती है। वह कब किसको अपने सर आंखों पर बैठा ले, कब किसे दिल में बसा ले, कब किसे नजरों से गिरा दे, कहना मुश्किल है। प्यार पाने के लिए स्त्री राजपाट, पदवी सब छोड़ने को तत्पर रहती है। एक बार प्रेम का अंकुर फूट आए तो फिर उसे मन से बुहारना मुश्किल है। एक बार वह यदि अपने दिल में किसी को बसा ले तो फिर पूरी दुनिया एक तरफ और दिल की आवा…

एकतरफा इश्क सबसे कमाल होता है !

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इश्क में इ़जहार जरूरी तो नहीं... बस प्यार करना आना चाहिए ! आज नहीं तो कल मोहब्बत मिलेगी ही, बस इंतजार करना आना चाहिए ! यहां सबकी जुबां पर एक ही सवाल होता है कि इश्क पे इतना क्यों बवाल होता है ! यहां दिल देकर दिल लेने की शर्त थोड़ी थी... अरे ऐसे जबर्जस्ती थोड़ी ना कोई प्यार होता है ! ना जवाब और ना सवाल होता है, ना कोई उम्मीद ना ही मलाल होता है पाने से ज्यादा उसे चाहने का ख्याल होता है इसलिए एकतरफा इश्क सबसे कमाल होता है !  तुमसे है,  बस है…!    तुम भी रहने दो अंदर तुम्हारे दिल में जो है तुम मेरी नहीं हो सकती फिर भी मैं क्या करूं ?   अब प्यार है…...तो है....              - शहरान








पत्रकार ही नहीं, खतरे में पत्रकारिता

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कलम की स्याही में पाक़ीज़गी से ही दमकती है लेखनी..... पत्रकार ही नहीं, खतरे में पत्रकारिता इस देश में जब-जब तेज तर्रार व निर्भिक पत्रकारों की हत्या होती है एक अर्थहीन बहस बहस छिड़ जाती है कि है कि सरकार और सरकार के भ्रष्ट तंत्र को आईना दिखाने वाले पत्रकार को किसने और क्यों मारा? सवाल तो यह होना चाहिए कि पत्रकार मौत के घाट क्यों उतारे जाते हैं? दुनिया जानती है कि बेबाक कलम का सर कलम करने की हिमाकत सब नहीं कर सकता। बस इतना ही कहना काफी है कि बाबरी मस्जिद से लेकर गुजरात तक और मॉब लिंचिंग से लेकर जय श्री राम तक, जैसी खूनी राजनीति करने वाली ताकतों और संगठनों के लिए पत्रकारों की जान लेना मुश्किल नहीं है। अब सवाल सिर्फ यह है कि बेबाक और सच लिखने वाले पत्रकार इस देश में बचे ही कितने हैं। जान की बाजी लगाकर अपनी कलम की आबरू बचाने वाले पत्रकारों की गिनती करो तो एक दर्जन भी नहीं मिलेंगे। कुछ बिक गए, कुछ डर गए और कुछ किनारे लगा दिए गए। जो चंद बचे हैं उन्हें गौरी लंकेश जैसों के रास्ते भेज दिया जाएगा। इसलिए, अब सवाल यह नहीं है कि इस देश में बेबाक पत्रकार कैसे बचेंगे, सवाल यह है कि इस देश में बेबाक, स्वत…